Taranah-e-Hindi II सारे जहाँ से अच्छा लिरिक्स II Muhammad Iqbal

Taranah-e-Hindi II सारे जहाँ से अच्छा लिरिक्स II Muhammad Iqbal : hindisonglyric.in में आपका स्वा गत है । sare jahan se achha hindustan hamara गीत को वर्ष 1905 में प्रसिद्ध शायर मुहम्मद इकबाल ने लिखा था । इस गीत sare jahan se achha को सबसे पहले सरकारी कॉलेज, लाहौर में पढ़कर सुनाया था । सारे जहॉं से अचछा को तराना ए हिंदी (Tarānah-e-Hindi) भी कहा जाता है । यह उर्दू भाषा में लिखी गई है । यह गीत sare jahan se achha इक़बाल की रचना बंग-ए-दारा में शामिल है ।
sare-jahan-se-accha-hindostan-hamara-lyrics
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सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा।
SARE JAHAN SE ACHHA. HINDOSTAN HAMARA ।
हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलिसताँ हमारा ।।
HUM BULBULAIN HAI ISS KI YEH GULSITAN HAMARA।।
सारे जहाँ से अच्छा..
SARE JAHAN SE ACHHA....


ग़ुरबत में हों अगर हम, रहता है दिल वतन में।
GHURBAT MEN HON AGAR HAM RAHTA HAI DIL VATAN MEN ।
समझो वहीं हमें भी, दिल हो जहाँ हमारा ।।
SAMJHO VAHIN HAMEN BHI DIL HAIN JAHAN HAMARA।।
सारे जहाँ से अच्छा..
SARE JAHAN SE ACHHA.


परबत वो सबसे ऊँचा, हमसाया आसमाँ का।
PARBAT VOH SAB SE UNCHA HAMSAYA ASMAN KA।
वो संतरी हमारा, वो पासबाँ हमारा।।
VOH SANTARI HAMARA VOH PASBAN HAMARA।।
सारे जहाँ से अच्छा..
SARE JAHAN SEACHHA.....

गोदी में खेलती हैं, उसकी हज़ारों नदियाँ।
GODI MEN KHELTI HAIN IS KI HAZARON NADIYA।
गुलशन है जिनके दम से, रश्क-ए-जिनाँ हमारा।।
GULSHAN HAI JIN KE DAM SE RASHK-E-JANAN HAMARA ।।
सारे जहाँ से अच्छा.. 
SARE JAHAN SE ACHHA....

ऐ आब-ए-रूद-ए-गंगा! वो दिन है याद तुझको। 
AYE AB RAUD GANGA VOH DIN HEN YAD TUJHKO ।
उतरा तेरे किनारे, जब कारवाँ हमारा।।
UTARA TERE KINARE JAB KARVAN HAMARA ।।
सारे जहाँ से अच्छा.
SARE JAHAN SE ACHHA...


मज़हब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना।
MAZHAB NAHIN SIKHATA APAS MEN BAYR RAKHNA।
हिन्दी हैं हम वतन हैं, हिन्दोस्ताँ हमारा।।
HINDVI HAI HAM VATAN HAI HINDOSTAN HAMARA ।।
सारे जहाँ से अच्छा..
SARE JAHAN SE ACHHA...

यूनान-ओ-मिस्र-ओ-रूमा, सब मिट गए जहाँ से।
YUNAN O MISR O ROMA SAB MIL GAYE JAHAN SE ।
अब तक मगर है बाक़ी, नाम-ओ-निशाँ हमारा
AB TAK MAGAR HAI BAQI NAM O NISHAN HAMARA ।।
सारे जहाँ से अच्छा..
SARE JAHAN SE ACHHA.....


कुछ बात है कि हस्ती, मिटती नहीं हमारी।
KUCH BAT HAI KEH HASTI MILATI NAHIN HAMARI ।
सदियों रहा है दुश्मन, दौर-ए-ज़माँ हमारा
SADIYON RAHA HAI DUSHMAN DAUR E ZAMAN HAMARA ।।
सारे जहाँ से अच्छा..
SARE JAHAN SE ACHHA......

'इक़बाल' कोई महरम, अपना नहीं जहाँ में।
IQBAL KOI MEHARAM APNA NAHIN JAHAN MEN ।
मालूम क्या किसी को, दर्द-ए-निहाँ हमारा।।
MALUM KYA KISI KO DARD E NIHAN HAMARA ।।
सारे जहाँ से अच्छा..
SARE JAHAN SE ACHHA.....


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